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प.पू. सत्यसाईबाबा एक समाजरत्‍न..!

24.4.11

प.पू. सत्यसाईबाबा एक समाजरत्‍न थे. उनके अकस्मात चले जाने से समाज का एक मसीहा खो गया है. दीनदुखियों एवं उपेक्षित समाज के लिए उन्होंने अमूल्य कार्य किया है. इस सामाजिक कार्य के साथ ही उन्होंने अध्यात्म के माध्यम से अखंड विश्‍व को बंधुभाव एवं शांति का संदेश दिया है. इस समय हमें ऎसा प्रतीत हो रहा है कि शांति का दूत हम सबके बीच से चला गया है.

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हिंदुस्तान के सभी नागरिकों से विनम्र आवाहन !

23.9.10

दि. २४ सितंबर २०१० को अयोध्या मामले में मा. न्यायालय की ओर से फैसला दिया जाने वाला है. स्वाभाविक रूप से हिंदू-मुस्लिम धर्मीयों में से किसी एक धर्म को यह निर्णय योग्य प्रतीत होगा तथा दूसरी पार्टी को इस कारण से नाराजी होगी. हमारे देश में न्याय व्यवस्था को अत्यंत आदर व सम्मान का स्थान प्राप्त है. मा. न्यायालय की ओर से इस मामले में कोई भी निर्णय हो, दोनों धर्म के लोगों ने इसे संयम व शांति से स्वीकार करना चाहिए. यदि हमें यह निर्णय अमान्य है तो सर्वोच्च न्यायालय में सही मार्ग से उस संदर्भ में अपील करने का अधिकार भारतीय लोकशाही ने प्रदान किया है. मात्र धर्मांध होकर देश को हानि पहुंचे, ऐसा कोई भी कृत्य हिंदुस्तानी जनता न करे. इसी में दोनों धर्मीयों का हित शामिल है.
हमारा देश विकास के पथ पर अग्रसर है. विश्व की एक उदयोन्मुख महासत्ता के रूप में संपूर्ण विश्व हमारी ओर देख रहा है. इस प्रगति में रुकावट पैदा हो, कृपया ऐसा कोई भी कृत्य दोनों धर्मों की ओर से न हो, इस बात की खबरदारी धार्मिक, राजकीय व सामाजिक नेतृत्व द्वारा ली जानी चाहिए.
हमारा हिंदुस्तान महासत्ता न बने, इसके लिए हमारे आसपास के अनेक देशों के प्रयत्न प्रारंभ हैं. आतंकवादी संगठन ऐसे अवसर की हमेशा प्रतीक्षा करते रहते हैं जिससे जातीय तनाव भड़के. जानबूझकर धार्मिक दंगे कराने के लिए वे निरंतर प्रयास कर रहे हैं. उनके लिए मददगार सिद्ध हो, ऐसा कोई भी अवसर हिंदुस्तान के प्रति स्वाभिमान रखने वाला कोई भी नागरिक आने नहीं देगा, ऐसी आशा है. भारत मेरा देश है. सभी भारतीय मेरे बांधव हैं. यह बात सभी धर्म के लोग ध्यान में रखकर आचरण करें. ऐसा आवाहन हम हिंदुस्तान के तमाम बांधवों से कर रहे हैं.

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शांति बनाए रखने का आवाहन

28.5.10

सभी हिंदू धर्मीयों से आवाहन किया जा रहा है कि फिलहाल कुछ समाचार चैनलों ने जगद्‌गुरु रामानंदाचार्य श्री स्वामी नरेंद्राचार्यजी महाराज की बदनामी करने का सत्र प्रारंभ किया है. इस पद्धति से जगद्‌गुरुश्री के धर्मकार्य, समाजकार्य व अध्यात्मिक कार्य में बाधा उत्पन्न करने का प्रयास किया जा रहा है. इस संदर्भ में योग्य कानूनी उपाययोजनाएं की जा रही हैं. हिंदू धर्मीयों व भक्तगणों से इन समाचारों से विचलित न होते हुए शांति बनाए रखने का आवाहन जगद्‌गुरु रामानंदाचार्य दक्षिण पीठ नाणिजधाम की ओर से किया गया है.

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आग्रहपूर्ण निमंत्रण

11.5.10

हमारे प्रिय भक्त, शिष्य एवं साधकों को यह बताते हुए अत्यंत हर्ष हो रहा है कि नाणिजधाम में हमारे उपास्य देवता का मंदिर निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है. उस मंदिर का कलशारोहण एवं मूर्ति की प्राणप्रतिष्ठा आपकी उपस्थिति में की जानी है. हमारे इस कार्य में व्यस्त होने के कारण आपसे प्रत्यक्ष संवाद स्थापित नहीं हो पाया. इसलिए इसे आग्रह का निमंत्रण समझकर १८ मई से २६ मई की समयावधि में नाणिजधाम में सह-कुटुंब, सहपरिवार अवश्य आएं. हम आपकी राह देख रहे हैं.

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हम क्यों देते हैं हिंदू धर्म में पुनर्प्रवेश?

2.1.10

संपूर्ण विश्व में सनातन वैदिक संस्कृति अत्यंत प्राचीन है. विश्व में इस संस्कृति के हिंदू लोग अनेक देशों में वास्तव्य करते थे. इस बात के असंख्य प्रमाण हमें प्राचीन ग्रंथों में देखने को मिलते हैं. विश्वव्यापक यह हिंदू संस्कृति धीरे-धीरे विलुप्त होते-होते अब केवल नाममात्र भारत देश में औषधि की तरह शेष बची है, यदि ऐसा कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी. इस हिंदू संस्कृति के पश्चात अनेक वर्षों में उदित हुई अनेक संस्कृतियां (धर्म) आज विश्वव्यापी होती जा रही हैं. विश्व में मुस्लिम, ईसाई जैसे धर्म विश्व के प्रत्येक देश में अपना स्वयं का अस्तित्व निर्माण करने लगे हैं... नहीं अपितु संपूर्ण देश ही उनकी मालकियत का होने जैसा चित्र आज अनेक देशों में दिखाई दे रहा है. दोनों ही संस्कृतियों को बड़ी प्यास लगी है... अन्य संस्कृतियों को पीकर विश्व में केवल एकमेव स्वधर्मीयों का ही वर्चस्व हो... इस स्पर्धा से कहीं हिंदू धर्म गिलंकृत न हो जाए? ऐसी परिस्थिति आज निर्माण हो गई है? ऐसा एक भी देश इस पृथ्वी पर शेष नहीं बचा है कि जिसे हिंदू धर्मीय हक से ’यह मेरा देश है’ कह सकें.
अल्प प्रमाण में ऐसी परिस्थिति है कि भारत में थोड़ा बहुत हिंदू धर्मीयों का सुना जा सकता है. इसलिए भारत के हिंदुओं को अस्तित्व की लड़ाई लड़ने के लिए जागृत होने की आवश्यकता है. इस धर्म को राजाश्रय न होने के कारण मुस्लिम एवं ईसाई लोग भारत देश में भी हिंदू धर्मीयों का धर्मांतरण कर रहे हैं. भारत में अनेक राज्यों में हिंदू अल्पसंख्यांक हैं. इस देश के उर्वरित राज्यों में मुस्लिमों का जेहादी लव एवं क्रिश्चनों का धर्मांतरण हिंदू धर्मीयों के अस्तित्व को प्रचंड धक्का पहुंचा रहे हैं. इसके पूर्व बंदूक का भय दिखाकर व तलवार की नोंक पर मुसलमानों व क्रिश्चनों ने इस देश के हिंदुओं को धर्मांतरित किया ही है, यह संभवतः उनकी दृष्टि से कम काम हुआ है. इसलिए राजाश्रय के बल पर खुलेआम मुस्लिम जेहादी लव के मार्फत हिंदू लड़कियों को मुसलमान बना रहे हैं, वहीं क्रिश्चन हिंदुओं की गरीबी एवं अज्ञान का फायदा उठाकर बाप्तिस्मा कर रहे हैं.
वास्तव में इस देश में समान नागरी कानून आवश्यक है, यह केवल धर्मगुरु के नाते से हमारा मत नहीं है अपितु सर्वोच्च न्यायालय ने भारत सरकार को कई बार समान नागरी कानून लागू करने का सुझाव दिया था. परंतु उनका समर्थन करने के लिए राजकर्ता जानबूझकर इस ओर अनदेखी कर रहे हैं. हिंदू धर्म का अस्तित्व बचाए रखने के लिए कम से कम धर्मांतरण बंदी कानून बना होता तो क्रिश्चन व मुसलमानों द्वारा आज जो धर्मांतरण किए जा रहे हैं, वे नहीं होते. सरकार कुछ नहीं करती और उपरोक्त कम्युनिटी हिंदुओं को चैन से जीने नहीं देती फिर धर्म की रक्षा करने के लिए जिन-जिन हिंदुओं को ये लोग धर्मांतरित कर रहे हैं, उन-उन हिंदू परिवारों को पुनःश्च शुद्ध कर इन धर्मांध लोगों पर क्या रोक नहीं लगाई जानी चाहिए?
मूलतः हिंदू धर्म से ईसाई धर्म में गए लोगों में हम हिंदू धर्म के विषय में जन-जागरण करते रहते हैं. हमारे इस जनजागरण के परिणामस्वरूप जिन्हें स्वेच्छा से हिंदू धर्म में वापस आने की बुद्धि हुई, उन लाखों परिवारों को पुनःश्च हिंदू धर्म में लाकर शुद्धिकरण की यह मुहिम हाथ में लेने से ईसाई मिशनरियों के कार्य पर कुछ प्रमाण में रोक लग रही है.
हमारे जैसा शुद्धिकरण का कार्य यदि हमारे शंकराचार्य एवं उर्वरित रामानंदाचार्य, उसी प्रकार हमारे अन्य साधु-संत करने लगे तो हमारे धर्मांतरित हिंदू पुनःश्च सम्मानपूर्वक हिंदू धर्म में वापस आ सकेंगे. यदि आप धर्म की रक्षा करेंगे तो ही धर्म आपकी रक्षा करेगा... धर्म के कारण ही एकजुटता हो सकती है... एकता के समक्ष राजसत्ता कमजोर पड़ जाती है. आज जिस-जिस धर्म में एकता है, उस-उस धर्म का लांगुल-चालन करने के लिए राजसता आतुर है...यदि आपको ऐसा लगता है कि आपके देवता, आपकी संस्कृति, आपके स्वतंत्र आचार-विचार अबाधित रहें तो धर्म की रक्षा हिंदू धर्मीयों के लिए समय की आवश्यकता है.
हम धर्मांध नहीं हैं, अन्यथा अन्य धर्म के लोगों को हिंदू धर्म की दीक्षा देकर इस धर्म में लाना हिंदू धर्म के लिए असंभव नहीं है. सहिष्णुवादी होने के कारण ही ऐसा अविचार हमारे मन को स्पर्श नहीं करता. हम धर्माभिमानी अवश्य हैं...हमारे धर्म की रक्षा करना... धर्म के प्रति जागरुकता निर्माण करना... क्या हमारा आद्य कर्तव्य नहीं है? इसका अर्थ विश्वबंधुत्व को नकारना नहीं होता. विश्वबंधुत्व के लिए हम तैयार हैं परंतु यदि कोई जानबूझकर हमारे बांधवों की आर्थिक परिस्थिति का, उनके अज्ञान का फायदा उठाकर धर्मांतरण करना चाहेगा तो उसे ’जैसे को तैसा’ उत्तर के रूप में शुद्धिकरण करना हमारा वज्रनिर्धार है.

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धर्मांध मत बनीए, धर्माभिमानी बनीए

20.12.09

वैदिक सनातन हिंदू धर्म की जय हो! ऐसा कहने वाले ’हिंदुओं’ यह बात ध्यान में लाएं, क्या सचमुच हमारी संस्कृति सनातन रह गई है? इस पृथ्वी पर अनेक देशों में हमारी यह वैदिक सनातन संस्कृति नामशेष होने के बाद भी हम इस स्वप्न से बाहर आने को तैयार नहीं हैं. विश्व में मुसलमान एवं क्रिश्चनों के अनेक देश हैं. फिर भी इस हिंदुस्तान में उन्हें अल्पसंख्यांक दर्जा दिया जाता है परंतु विश्व में हिंदुओं का एक भी देश नहीं है. फिर भी इस हिंदू को बचाने के लिए कोई भी शासन प्रयास नहीं करता. इस देश को विकसित करने के लिए हिंदुओं का परिवार कल्याण कर देश की जनसंख्या कंट्रोल करने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है. उत्तर-पूर्व राज्य एवं दक्षिण के कुछ राज्यों में हिंदू पूर्णतः अल्पसंख्याक हो चुका है. फिर भी हिंदुओं को ही परिवार नियोजन की सीख दी जाती है. इस देश में क्रिश्चन मिशनरी दिनोंदिन हिंदुओं का धर्मांतरण (कन्वर्जन) कर रहे हैं, उन्हें क्रिश्चन बना रहे हैं. यह क्या कम था कि.... अब मुस्लिमों का जेहादी लव आक्रामक होने लगा है. हिंदू लड़कियों को मुस्लिम लड़के अपने प्रेम के जाल में फांसकर विवाह बंधन में बंधने के लिए मुसलमान बना रहे हैं. यह कार्य बड़े पैमाने पर संपूर्ण हिंदुस्तान में प्रारंभ हो चुका है.
इस देश की हिंदुत्ववादी पार्टियां सत्ता के लालच में हिंदुओं का पक्ष दृढ़ता से रखते हुए दिखाई नहीं दे रही हैं. इसलिए ही आज राममंदिर का मुद्दा १७ वर्ष होने के बाद भी धूल खाता पड़ा है. समान नागरिक कानून देश के स्थैर्य की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है परंतु हिंदुत्ववादी पार्टियां प्रस्तुत मुद्दा जिस ताकत से उठाना चाहिए, वैसा उठाते हुए दिखाई नहीं देतीं.
भिन्न-भिन्न प्रकार के कानून बनाकर सेक्युलर पक्ष अन्य धर्मीयों का समर्थन कर रहा है. इसके विपरीत हिंदुत्ववादी पक्ष भीतर से उनके एजेंडे को मूक सहमति दे रहे हैं. राजश्रय नहीं होगा तो आपके धर्म का अस्तित्व किस प्रकार टिकेगा? इसके लिए हिंदुओं को अन्य धर्मीयों से सीख लेनी चाहिए. वे किसी भी राजनीतिक पार्टी से बंधे नहीं होते. जो हमारे धर्म का सम्मान करेगा वह उम्मीदवार हमारा, ऐसी भूमिका आप क्यों नहीं अख्तियार कर सकते? धर्मगुरु के नाते से हम आपसे आह्‌वान कर रहे हैं उठें, जागृत हों! अपना धर्म, अपनी संस्कृति, अपना न्याय-हक यदि अबाधित रखना है तो आप भी ऐसी मुहिम चलाएं कि, जो उम्मीदवार हमारे हिंदुओं का पक्ष रखेगा, नहीं.... नहीं... जो उम्मीदवार हमारे मुद्दे प्राथमिकता से उठाएगा, ऐसा उम्मीदवार ही हम पर राज्य करेगा. हम उसकी जाति, धर्म, पार्टी नहीं देखेंगे. हमारे धर्म के आवाहन के अनुसार आचरण करेंगे एवं धर्म की रक्षा करेंगे.
यदि आपने हमारी बात नहीं सुनी तो एक दिन ऐसा उदित होगा कि हमारे नाम...हमारा धर्म बदलकर हम पर धर्मांतरित लोगों की तरह जीवन जीने की नौबत आ जाएगी. केवल हमें ही नहीं... तो हमारी वंशबेल भी धर्मांतरित होगी. क्या सचमुच आपमें अपने धर्म के प्रति स्वाभिमान है? यदि है तो हमारा यह संदेश अनेक लोगों को बताएं. आप करें और दूसरों से भी करने को कहें यदि आपमें हिंदू का रक्त है तो स्वाभिमानी बनें!

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